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पंजाब

मिशन रोजगार के तहत युवाओं के उज्ज्वल भविष्य की गारंटी दे रही मान सरकार

मिशन रोजगार के तहत युवाओं के उज्ज्वल भविष्य की गारंटी दे रही मान सरकार

युवा देश का भविष्य होता है। लेकिन युवा भविष्य उज्ज्वल होगा, तभी देश और राज्य का भविष्य भी उज्ज्वल होगा। इसी कड़ी में पंजाब की भगवंत मान सरकार राज्य के युवाओं तो रोजगार देकर उनका भविष्य संवारने में लगी है। जिसे लेकर मान सरकार द्वारा मिशन रोजगार भी चलाया जा रहा है।

मिशन रोजगार के तहत मान सरकार अबतक करीब 52 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां दे चुकी है। राज्य में ऐसे भी परिवार हैं जहां एक ही घर में तीन सरकारी नौकरियां, पूरी तरह योग्यता के आधार पर, बिना किसी रिश्वत के प्राप्त हुई हैं। यही नहीं, भविष्य में राज्य में स्थापित हो रहे नए उद्योगों से 4 लाख नए रोजगार सृजित होंगे।

इसके साथ ही पंजाब सरकार ने बजट में कौशल प्रशिक्षण और करियर काउंसलिंग के लिए 230 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जो पिछले साल की तुलना में 50 प्रतिशत से अधिक है। यही नहीं मान सरकार ने अप्रैल 2024 से फरवरी 2025 तक 1,468 प्लेसमेंट कैम्प आयोजित कर 85,248 युवाओं को नौकरी दी है। वहीं, स्वरोजगार के लिए 24,345 को ऋण सहायता प्रदान की है। मान सरकार पंजाब के युवाओं को नशे की गर्त से बचा कर उन्हें एक उज्ज्वल भविष्य देने के लिए लगातार काम कर रही है।

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सांसद राघव चड्ढा ने भारत पर लगाए अमेरिकी टैरिफ और स्टारलिंक की एंट्री को लेकर केंद्र से पूछे तीखे सवाल, कहा- स्टारलिंक को “बर्गेनिंग चिप” की तरह करें इस्तेमाल*

संसद में AI क्रांति पर बोले सांसद राघव चड्ढा, कहा- चाइना के पास डीपसीक, अमरीका के पास chatGPT, भारत कहां खड़ा है?

राज्यसभा में गुरुवार को एक महत्वपूर्ण चर्चा के दौरान आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने भारत में अमेरिकी कंपनी स्टारलिंक की एंट्री और अमेरिका की तरफ से भारतीय सामान पर लगाए गए टैरिफ को लेकर केंद्र सरकार की नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए। चड्ढा ने स्टारलिंक को मंजूरी देने से पहले राष्ट्रीय सुरक्षा, डेटा गोपनीयता और इसके संभावित दुरुपयोग जैसे मुद्दों पर सरकार का रुख स्पष्ट करने की मांग की है। यह चर्चा उस समय हुई जब भारत सरकार स्टारलिंक को देश में ब्रॉडबैंड सेवाओं के लिए लाइसेंस देने की तैयारी कर रही है।

सरकार ने गूगल टैक्स किया माफ

राघव चड्ढा ने अपने सवालों को बेहद जोरदार तरीके से संसद में रखते हुए कहा कि भारत ने हमेशा अमेरिका के प्रति अपनी दोस्ती और वफादारी दिखाई है। हाल ही में वित्त मंत्री द्वारा फाइनेंस एक्ट में संशोधन कर गूगल टैक्स यानी और इक्विलाइजेशन लेवी को हटाने का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि इससे अमेरिकी कंपनियों जैसे मेटा, अमेजन और गूगल को फायदा मिला, लेकिन भारत को लगभग 3000 करोड़ रुपये के राजस्व का घाटा हुआ। लेकिन इसके बावजूद, ट्रंप प्रशासन ने भारतीय सामानों पर 26 फीसदी का टैरिफ लगा दिया, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगा है। चड्ढा ने इसे भारत के लिए नुकसानदायक बताते हुए कहा कि इससे हमारी जीडीपी पर 50 से 100 बेसिस पॉइंट्स का असर पड़ सकता है।

भारत-अमेरिका के रिश्तों पर कसा तंज

राघव चड्ढा ने कहा, “हमने अमेरिका का दिल जीतने के लिए सब कुछ किया। लेकिन बदले में अमेरिका ने 26 फीसदी टैरिफ लगाकर भारतीय अर्थव्यवस्था को झटका दिया। उन्होंने भारत-अमेरिका के रिश्तों पर तंज कसते हुए कहा, “अच्छा सिला दिया तूने मेरे प्यार का, यार ने ही लूट लिया घर यार का।”

स्टारलिंक को “बर्गेनिंग चिप” की तरह करें इस्तेमाल

राघव चड्ढा ने सुझाव दिया कि भारत सरकार को एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक को दी जाने वाली मंजूरी रोकनी चाहिए और उसका इस्तेमाल अमेरिका से फिर से टैरिफ को लेकर बातचीत में “बर्गेनिंग चिप” के तौर पर करना चाहिए।

ड्रग तस्करों के पास से मिला था स्टारलिंक

अपने भाषण के दौरान सांसद राघव चड्ढा ने स्टारलिंक को लेकर कुछ चिंताजनक घटनाओं का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि यूक्रेन युद्ध के दौरान एलन मस्क ने खुद सोशल मीडिया पर कहा था कि “स्टारलिंक यूक्रेनियन आर्मी की रीढ़ है, अगर मैं इसे बंद कर दूं तो पूरी फ्रंटलाइन धराशायी हो जाएगी।”

उन्होंने कहा कि भारत को भी इससे सतर्क रहना चाहिए क्योंकि भारत की संप्रभुता और सुरक्षा सर्वोपरि है।

उन्होंने मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए कहा कि कुछ महीने पहले अंडमान में 6000 किलो सिंथेटिक ड्रग्स की जब्ती के दौरान यह पाया गया कि म्यांमार के ड्रग तस्करों ने नेविगेशन के लिए स्टारलिंक सैटेलाइट इंटरनेट का इस्तेमाल किया था।
वहीं, जब भारत सरकार ने इस बारे में डेटा और डिवाइस की जानकारी स्टारलिंक से मांगी, तो कंपनी ने डेटा प्राइवेसी लॉ का हवाला देकर जानकारी देने से इनकार कर दिया।

कैसे निपटेगी भारत सरकार

राघव चड्ढा ने पूछा, “जब एक विदेशी कंपनी भारत के कानून और सुरक्षा एजेंसियों के साथ सहयोग नहीं करती, तो ऐसे में सरकार क्या योजना बना रही है?” उन्होंने सरकार से दो प्रमुख सवाल पूछे – पहला, सरकार स्टारलिंक जैसी कंपनियों से आने वाले प्रतिरोध से कैसे निपटेगी? और दूसरा, सरकार सैटेलाइट स्पेक्ट्रम के संभावित दुरुपयोग से कैसे निपटेगी?

सांसद राघव चड्ढा ने कहा कि वे हर उस मुद्दे को सदन में उठाते रहेंगे, जो भारतीय हितों और भारत की आर्थिक संप्रभुता को प्रभावित करता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका सवाल किसी कंपनी के खिलाफ नहीं, बल्कि भारत की सुरक्षा, संप्रभुता और डेटा नीति की मजबूती के लिए है।

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पंजाब

खालिस्तानी समर्थक पन्नू को आप नेताओं ने दिया मुंह तोड़ जवाब

आम आदमी पार्टी के नेताओं ने गुरपतवंत पन्नू द्वारा डॉ भीमराव अंबेडकर की मूर्तियों को तोड़ने वाले बयान की सख्त निंदा की है और उसे दलित, संविधान और देशविरोधी करार दिया।

जालंधर में आप नेता पवन कुमार टीनू ने इस मुद्दे पर आप विधायक बलकार सिंह और आप नेता राजविंदर कौर थियाड़ा, चंदन ग्रेवाल, आत्म प्रकाश बब्लू, दिनेश ढल्ल, चरणजीत चन्नी, दीपक शारदा और तरनदीप सिंह सनी के साथ एक प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित किया।

टीनू ने कहा कि विदेश में बैठे भगोड़े गुरपतवंत पन्नू का घिनौना बयान सिर्फ बाबा साहब डॉ भीमराव अंबेडकर के खिलाफ नहीं है। यह दलित भाईचारे और संविधान के भी खिलाफ है। डॉ भीमराव अंबेडकर सिर्फ दलित के नहीं बल्कि पूरे देश के हीरो हैं। डॉ अंबेडकर देश का संविधान बनाकर सभी लोगों को समानता का अधिकार दिया। अगर आज देश एक है तो वह संविधान के कारण है।

टीनू ने कहा कि गुरपतवंत पन्नू को डॉ अंबेडकर का देश के प्रति योगदान के बारे में कुछ नहीं पता है। उसे सिख धर्म के बारे में भी कोई जानकारी नहीं है क्योंकि सिख धर्म ‘सरबत दा भला’ की बात करता है और सभी लोगों को एकसमान मानता है। गुरु गोविंद सिंह जी ने तो दलितों को ‘रंगरेटा गुरु का बेटा’ का खिताब दिया था।

उन्होंने कहा कि पन्नू अमेरिका में बैठकर अक्सर भारत को तोड़ने की बातें करता है, लेकिन हम उसे चुनौती देते हैं कि अगर इतने ही बहादुर हो तो भारत आओ और यहां आकर अपनी बात रखो। वहां बैठकर यहां के लोगों को मत भड़काओ। टीनू ने कहा कि जो उसने धमकियां दी है उसका जवाब आम आदमी पार्टी ठोक कर देगी।

टीनू ने सवाल उठाया कि कुछ लोग अक्सर दलित अंबेडकर और संविधान विरोधी बातें सार्वजनिक तौर पर करते हैं और समाज का माहौल खराब करने की कोशिश करते हैं। इसलिए भारत सरकार को यह पता लगाकर रह स्पष्ट करना चाहिए कि ऐसे लोगों के उसके पीछे कौन सी एजेंसी या कौन सी राजनीतिक शक्ति काम कर रही है।

हमारी केंद्र सरकार से भी अपील है कि अगर पन्नू केंद्र की एजेंसियों की कठपुतली नहीं है तो उसके खिलाफ तुरंत सख्त कार्रवाई कर उसको भारत लेकर आना चाहिए। आप नेता ने गृहमंत्री अमित शाह के संसद में दिए डॉक्टर अंबेडकर के खिलाफ दिए अपमानजनक बयानों का भी जिक्र किया और कहा कि इन बयानों से काफी संदेह पैदा होता है। इसलिए केंद्र सरकार को इसपर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए और इस मामले की गहनता पूर्वक जांच करनी चाहिए।

मीडिया को संबोधित करते हुए आप विधायक बलकार सिंह ने कहा कि पन्नू पंजाब का माहौल और आपसी भाईचारा खराब करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि डॉ अंबेडकर ने सिर्फ दलितों को ही अधिकार नहीं दिया है, उन्होंने सभी धर्मों और जाति के लोगों को संवैधानिक तौर पर वोट डालने का अधिकार समेत अन्य मूल अधिकार दिया। इसलिए पन्नू का बयान उसकी घटिया मानसिकता को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि 14 तारीख को उसने बाबासाहेब की मूर्तियों को तोड़ने की जो धमकी दी है, उसे हम नाकाम करेंगे। पूरे पंजाब में आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता डॉ अंबेडकर की मूर्ति के पास पहरा देंगे उन्हें किसी भी तरह का नुकसान नहीं होने देंगे।

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पंजाब

आप का पलटवार – “गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की पहल का राजनीतिकरण क्यों?” डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट पर साधा निशाना!

आम आदमी पार्टी (आप) ने पंजाब में सरकारी स्कूलों में सुधार लाने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण शिक्षा सुधारों का विरोध करने के लिए डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट की कड़ी आलोचना की है। आप के वरिष्ठ प्रवक्ता नील गर्ग ने शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने और छात्रों के लिए बेहतर माहौल बनाने के लिए की गई पहल का राजनीतिकरण करने के प्रयास के लिए टीचर्स फ्रंट की निंदा की।

नील गर्ग ने कहा कि अगर डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट को राजनीति में इतनी दिलचस्पी है, तो उसे पंजाब की शिक्षा प्रणाली में सकारात्मक बदलावों में बाधा डालने के बजाय खुले तौर पर खुद को एक राजनीतिक पार्टी घोषित करना चाहिए। उन्होंने बताया कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत, सरकारी स्कूलों के विकास में सक्रिय रूप से योगदान देना स्थानीय प्रतिनिधियों और गांव के सरपंचों से लेकर विधायकों तक की जिम्मेदारी है। स्कूल के बुनियादी ढांचे और शैक्षणिक मानकों के उत्थान के लिए उनकी भागीदारी आवश्यक है।

पंजाब सरकार के नवीनतम निर्देश पर प्रकाश डालते हुए गर्ग ने बताया कि राज्य के सभी सरकारी स्कूलों की निगरानी अब विधायकों और मंत्रियों द्वारा की जा रही है, जो विकास कार्यों की समीक्षा करने और पूर्ण परियोजनाओं का उद्घाटन करने के लिए जिम्मेदार हैं। उन्होंने इसे एक प्रगतिशील कदम बताया जो जवाबदेही सुनिश्चित करता है और सरकारी स्कूलों के समग्र प्रशासन में सुधार करता है।

गर्ग ने कहा, “यह पहल शिक्षा प्रणाली में सार्वजनिक और सामुदायिक भागीदारी को काफी मजबूत करेगी। शिक्षा के अधिकार के तहत स्कूल मामलों की देखरेख के लिए स्कूल प्रबंधन समितियां (एसएमसी) बनाई जाती हैं। हालांकि, डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट जानबूझकर इस तथ्य को नजरअंदाज कर रहा है। उनका अस्तित्व पूरी तरह से पंजाब के शिक्षा क्षेत्र की बेहतरी में योगदान देने वाली किसी भी पहल का विरोध करने पर आधारित प्रतीत होता है।”

गर्ग ने डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट को एक भी ऐसा उदाहरण बताने की चुनौती दी जहां उन्होंने पंजाब में शिक्षा में सुधार की दिशा में सक्रिय रूप से काम किया हो। गर्ग ने जोर देकर कहा, “इस संगठन के गठन के बाद से क्या उन्होंने कभी बच्चों के लिए बेहतर शिक्षा के लिए विरोध प्रदर्शन किया है? क्या उन्होंने कभी शिक्षकों को सरकारी स्कूलों में उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा प्रदान करने के लिए प्रोत्साहित किया है? क्या उन्होंने छात्रों को आगे की पढ़ाई तक पहुंच सुनिश्चित करने में कोई योगदान दिया है? जवाब नहीं है।”

उन्होंने फ्रंट पर सरकारी स्कूलों में सुधार के लिए समुदायों, अभिभावकों और स्थानीय प्रतिनिधियों को शामिल करने के पंजाब सरकार के प्रयासों को बदनाम करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “जब भी सरकार पारदर्शिता और सामुदायिक भागीदारी की दिशा में कदम उठाती है, ये तत्व उसे बदनाम करने के लिए आगे आते हैं।”

शैक्षिक सुधारों के प्रति आप की प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हुए गर्ग ने सभी पंजाबियों से शिक्षा क्रांति लाने के राज्य के प्रयासों का समर्थन करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सरकार की पहल पूरी तरह से छात्रों के कल्याण पर केंद्रित है और किसी भी राजनीतिक एजेंडे से प्रेरित नहीं है।

उन्होंने कहा कि शिक्षा एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। जो लोग शिक्षा के मामले में भी क्षुद्र राजनीति करते हैं, उन्हें शर्म आनी चाहिए। पंजाब परिवर्तन के युग का गवाह बन रहा है और पंजाब के लोगों को बेहतर सरकारी स्कूलों के माध्यम से अपने बच्चों का बेहतर भविष्य बनाने के लिए एकजुट होना चाहिए।

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